अर्जुन का पेड़ (Terminalia arjuna) आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष माना गया है। इसे हृदय रोगों की “अमृत औषधि” भी कहा जाता है। यह पेड़ भारत के लगभग सभी हिस्सों में नदियों, तालाबों और जलस्रोतों के किनारे स्वाभाविक रूप से पाया जाता है।
अर्जुन के औषधीय गुण और लाभ :-—
1. हृदय रोगों में लाभकारी :
अर्जुन की छाल हृदय की पेशियों को मजबूत बनाती है और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करती है। यह ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय की धड़कन की अनियमितता में अत्यंत लाभ देती है। आयुर्वेद में इसे “हृदय-बल्य” — यानी हृदय को शक्ति देने वाली औषधि कहा गया है।
2. रक्त शुद्धिकरण में सहायक :
अर्जुन की छाल में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं और रक्त को शुद्ध करते हैं।
3. हड्डियों और घावों के लिए उपयोगी :
अर्जुन की छाल का लेप हड्डी के फ्रैक्चर, सूजन या घावों पर लगाने से लाभ मिलता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को कम करते हैं।
4. दस्त और मूत्र रोगों में लाभकारी :
अर्जुन की छाल का काढ़ा दस्त, पेचिश और मूत्र संक्रमण में लाभदायक है। मूत्र में जलन या संक्रमण की स्थिति में इसका सेवन राहत देता है।
5. श्वसन और खांसी में राहत :
अस्थमा, खांसी या सांस की तकलीफ में अर्जुन छाल का काढ़ा या चूर्ण लाभकारी होता है। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है और बलगम को कम करता है।
अर्जुन के सेवन के प्रमुख तरीके :—
- 1️⃣ अर्जुन छाल का काढ़ा :
एक चम्मच अर्जुन छाल का चूर्ण दो कप पानी में डालकर उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए।
छानकर सुबह और शाम सेवन करें। - 2️⃣ अर्जुन दूध :
एक चम्मच छाल का चूर्ण दूध में उबालकर पीने से हृदय रोगों में विशेष लाभ होता है। - 3️⃣ अर्जुन चूर्ण :
आधा से एक चम्मच अर्जुन चूर्ण सुबह और शाम गुनगुने पानी या दूध के साथ लें।
सावधानियाँ :—
- अधिक मात्रा में सेवन करने से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है।
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चिकित्सक की सलाह से ही इसका सेवन करना चाहिए।
- लंबे समय तक नियमित सेवन से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।
- अर्जुन का पेड़ न केवल औषधीय दृष्टि से अमूल्य है, बल्कि यह पर्यावरण की शुद्धि में भी अहम भूमिका निभाता है।




